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ग्राम प्रधानों का शक्ति प्रदर्शन, सचिवालय घेराव के लिए उमड़ा प्रदेशभर का जनसैलाब

परेड ग्राउंड से विशाल रैली निकालकर सचिवालय कूच, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा,

देहरादून। उत्तराखंड के ग्राम प्रधानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को राजधानी देहरादून में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और यहां से विशाल रैली के रूप में सचिवालय घेराव के लिए कूच किया। इस दौरान प्रधान संगठन के पदाधिकारियों और प्रमुख वक्ताओं ने सरकार के सामने ग्राम पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पुलिस मुख्यालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया, जिसके बाद कुछ देर पुलिस और प्रधानों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

प्रधान संगठन का कहना है कि यह आंदोलन केवल ग्राम प्रधानों के मानदेय का मुद्दा नहीं है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण रोजगार, पंचायतों के अधिकार और विकास कार्यों में ग्राम पंचायतों की भूमिका से भी जुड़ा हुआ है।

ऑनलाइन हाजिरी बनी सबसे बड़ा मुद्दा,

प्रधानों की प्रमुख मांग वीबी-जी राम जी योजना में श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता को समाप्त कर ऑफलाइन हाजिरी की व्यवस्था लागू करने की है।

संगठन का तर्क है कि उत्तराखंड के दूरस्थ और पर्वतीय गांवों में आज भी कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद कमजोर है। ऐसे में कार्यस्थल पर मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में तकनीकी परेशानी आती है। प्रधानों के मुताबिक, नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण श्रमिकों की हाजिरी समय पर दर्ज नहीं हो पाती और इसका असर मजदूरों के रोजगार और भुगतान पर पड़ता है। यही समस्या विभिन्न जिलों में पहले भी प्रधान संगठनों के आंदोलनों का प्रमुख मुद्दा रही है।

प्रधानों की मांग है कि पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऑफलाइन हाजिरी का विकल्प दिया जाए, ताकि नेटवर्क की समस्या के कारण किसी मजदूर को रोजगार से वंचित न होना पड़े।

प्रधानों का मानदेय 20 हजार करने की मांग,

ग्राम प्रधान संगठन ने ग्राम प्रधानों का न्यूनतम मासिक मानदेय 20 हजार रुपये किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्यों को प्रत्येक खुली बैठक में भाग लेने पर मानदेय देने की मांग की गई है।

ग्राम सभा में काम, लेकिन प्रधानों को जानकारी नहीं?

प्रधानों ने यह सवाल भी उठाया कि जब किसी ग्राम सभा के क्षेत्र में किसी विभाग द्वारा विकास कार्य कराया जाता है तो ग्राम प्रधान को कई बार उसकी जानकारी या कार्य में समुचित सहभागिता नहीं मिलती।

संगठन की मांग है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों में ग्राम पंचायत और ग्राम प्रधान की भूमिका स्पष्ट की जाए तथा पंचायत को विकास कार्यों से बाहर न रखा जाए।

प्रधान संगठन ने 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाए जाने की मांग भी की है। साथ ही पंचायतों को अधिक अधिकार और संसाधन देने की मांग उठाई गई है।

वित्तीय अधिकार बढ़ाने की मांग,

प्रधान संगठन की मांगों में राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त की धनराशि को ग्राम पंचायतों की जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाना भी शामिल है।

इसके अलावा जिला योजना में ग्राम पंचायतों के प्रस्तावों को ग्राम सभा की खुली बैठक से अनिवार्य रूप से पारित कराने और जिला योजना की बैठकों में प्रधान संगठन के प्रतिनिधि को शामिल करने की मांग की गई है।

29 विभागों के अधिकार पंचायतों को देने की मांग,

 

प्रधान संगठन का कहना है कि पंचायतीराज व्यवस्था के तहत पंचायतों को जिन 29 विभागों से संबंधित अधिकार मिलने की बात है, उन्हें वास्तविक रूप से ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।

संगठन ने विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई है, ताकि गांवों में छोटी विकास जरूरतों और आपात परिस्थितियों में पंचायतें तेजी से काम कर सकें।

इसके अलावा ग्राम प्रधानों के स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल करने तथा पंचायतों पर लगाए गए 100 रुपये प्रति परिवार टैक्स से संबंधित व्यवस्था में राहत देने जैसी मांगें भी 10 सूत्रीय मांगपत्र में शामिल हैं।

परेड ग्राउंड से सचिवालय तक गूंजा प्रधानों का विरोध

गुरुवार को परेड ग्राउंड में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने पहले सभा की। मंच से संगठन के पदाधिकारियों और प्रमुख वक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग की। इसके बाद प्रधान विशाल रैली के रूप में सचिवालय की ओर बढ़े।

पुलिस ने सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग कर रैली को रोक दिया। आगे बढ़ने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि जब तक उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। पिछले कई महीनों से संगठन इन मुद्दों को अलग-अलग स्तरों पर उठाता रहा है और अब प्रदेशभर के प्रधानों ने राजधानी में सामूहिक रूप से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

नंदा न्यूज़ के लिए — देहरादून से विशेष रिपोर्ट।

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