‘अब छाया में गुजन होगा वन में फूल खिलेंगे, दशा-दिशा से अब सौरभ के धूमिल मेघ उठेंगे
—-हिमालय के प्रसिद्ध कवि चन्द्र कुँवर बर्त्वाल—–आज 20 अगस्त जिनकी जयंती है— हेमचंद्र सकलानी—-***************“मुझे इसी में है संतोष हिमगिरि में छोटा सा घर हो!”चन्द्र कुंवर बर्त्वाल हिन्दी कविता साहित्य के एक मात्र ऐसे कवि कहे जा सकते हैं जिन्होंने हिमालय, प्रकृति,पर्यावरण के साथ मनुष्य मन की खूबसूरत संवेदनाओं भावनाओं को अपनी कविताओं में भरपूर जिया…

