भावनाओं की भाषा से ज्ञान-विज्ञान और सामाजिक परिवर्तन की भाषा तक
-भाषा केवल शब्दों का संसार नहीं; वह मनुष्य के विचार, स्मृति, संस्कृति और भविष्य को आकार देने वाली शक्ति –डॉ. ज्योति प्रसाद गैरोला— 14 सितंबर आते ही हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में हिंदी के सम्मान की बातें होती हैं। कविताएँ पढ़ी जाती हैं, भाषण दिए जाते हैं और हिंदी…

