“जब देवभूमि उत्तराखंड के स्वाभिमान, सम्मान और हितों की बात आती है, तब सिर्फ़ एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि देवभूमि का प्रहरी बनकर पुष्कर सिंह धामी सामने खड़े दिखाई देते हैं।”
देहरादून | नंदा न्यूज़
देवभूमि का प्रहरी केवल विकास की नई इबारत ही नहीं लिखता, बल्कि उन संघर्षों और बलिदानों को भी सम्मान देता है, जिनकी मजबूत नींव पर उत्तराखंड राज्य खड़ा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय इसी सोच और संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन केवल एक राजनीतिक संघर्ष नहीं था, बल्कि हजारों आंदोलनकारियों के त्याग, बलिदान और अथक प्रयासों का परिणाम था। अनेक लोगों ने लाठीचार्ज सहा, जेल यात्राएं कीं और कई परिवारों ने अपने प्रियजनों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके योगदान को सम्मान देना राज्य का नैतिक दायित्व है।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों, संघर्षों और बलिदानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को भी उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास और उसके नायकों के योगदान से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई लोगों ने आंदोलन के दौरान लाठियां खाईं, जेल यात्राएं कीं और अनेक परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया। ऐसे संघर्ष और बलिदान को सम्मान देना सरकार का कर्तव्य है।
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