
देहरादून। लेखक गाँव की प्रकृति की पाठशाला में लेखक गाँव एवं स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर श्हिंदी हमारी पहचान, हिंदी हमारा अभिमान’ विषय पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर साहित्यकारों ने हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा, उसके विकास की यात्रा और वर्तमान समय में हिंदी की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। कवियों एवं साहित्यकारों की रचनात्मक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को साहित्यिक रंग प्रदान किया। गीत और कविताओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी के प्रति आत्मीय भाव भी अभिव्यक्त हुआ।
कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की उपस्थिति रही। उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, परंपरा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी भाषा है। हिंदी को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों एवं रचनाकारों ने सहभागिता की। इस अवसर पर राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, नोएडा से प्रसिद्ध लेखिका शोभा त्रिपाठी, बलवीर तलवार, अरुण पाठक, भारती डिमरी, वीरेन्द्र डंगवाल ‘पार्थ’, जसवीर सिंह हलदार, सत्य प्रकाश शर्मा, डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी, संस्कार शाला से सविता रतूड़ी, महेश कुड़ियाल, प्रियंका भट्ट, बृजपाल रावत सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही विभिन्न साहित्यिक पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया तथा गीतों एवं कविताओं की प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमुदाय को हिंदी की साहित्यिक समृद्धि से परिचित कराया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. बेचैन कंडियाल ने किया तथा संचालन नीलम पांडेय ‘नील’ ने किया। संगोष्ठी में साहित्य, भाषा और संस्कृति से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद के साथ हिंदी के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को अभिव्यक्ति मिली।
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