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“लाटूधाम वाण” से गूंजे नंदा के जयकारे, धर्म भाई “लाटू” देवता की अगुवाई में कैलास रवाना हुईं देव डोलियां,

मां नंदा की कैलास विदाई पर छलकी आंखें…

#लाटूधाम वाण से जयकारों के बीच कैलास को निकलीं देव डोलियां, हजारों श्रद्धालुओं के साथ आगे बढ़ी नंदा की महायात्रा,

शुक्रवार को बेदनी कुंड में होगा पवित्र स्नान, पूजा-अर्चना और पितृ तर्पण का विशेष अनुष्ठान,

चमोली : हिमालय की वादियों में आज आस्था और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने मां नंदा के भक्तों को भावुक कर दिया। लाटूधाम वाण से मां नंदा की देव डोलियां और छंतोलियां कैलास के लिए रवाना हो गईं। विदाई के इस पल में वाण का माहौल भावनाओं से भर उठा। मां नंदा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं की आंखें छलछला गईं और हजारों भक्त देव डोलियों के साथ कैलास की राह पर निकल पड़े।

वाण में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा के धर्म भाई लाटू देवता की अगुवाई में देव डोलियां कैलास के लिए रवाना हुईं। जैसे ही देव डोलियां आगे बढ़ीं, श्रद्धालुओं ने जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान कर दिया।

यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिमालय की सदियों पुरानी लोक आस्था, परंपरा और मां-बेटी के भावनात्मक रिश्ते से जुड़ा वह अवसर है, जब नंदा को कैलास के लिए विदा किया जाता है।

🔱 देव डोलियों के साथ उमड़ा आस्था का सैलाब

मां नंदा की बड़ी जात की दशोली और बंड की उत्सव डोलियां एवं छंतोलियां भी इस यात्रा में शामिल रहीं। इसके साथ ही बधाण की राजराजेश्वरी की लोकजात की उत्सव डोली भी कैलास के लिए विदा हुई।

 

हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में देव डोलियां गैरोलीपातल के निर्जन पड़ाव पर रात्रि प्रवास के लिए पहुंचीं। देव डोलियों और छंतोलियों के साथ श्रद्धालुओं का विशाल हुजूम भी वाण से कैलास की ओर बढ़ता चला गया।

🔱 अब बेदनी कुंड में होगी आस्था की अग्निपरीक्षा

कैलास यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा बेदनी कुंड। शुक्रवार को यहां मां नंदा का पवित्र स्नान कराया जाएगा। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना के साथ पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण की परंपरा निभाई जाएगी।

बेदनी कुंड में एक साथ दिखाई देगा—देवी की आराधना, प्रकृति की विराटता और पुरखों के प्रति श्रद्धा का अद्भुत संगम।

दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार कर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक परंपरा के साक्षी बनने के लिए बेदनी पहुंचेंगे।

⚔️ महिषासुर वध से जुड़ी है बेदनी कुंड की मान्यता

लोकमान्यता के अनुसार कैलास जाते समय मां नंदा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध कर उसे बेदनी कुंड में समाहित किया था। इसी मान्यता के कारण बेदनी कुंड मां नंदा की यात्रा में विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

यहां मां नंदा की पूजा के साथ पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की भी परंपरा रही है।

पुजारी देवी दत्त कुनियाल के अनुसार बेदनी कुंड में पितृ तर्पण के माध्यम से श्रद्धालु अपने पुरखों का स्मरण करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करते हैं।

🚩 लोकजात लौटेगी बांक, मां नंदा करेंगी छह माह का प्रवास

बेदनी कुंड में स्नान, पूजा-अर्चना और पितृ तर्पण की धार्मिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बधाण की नंदा की लोकजात यात्रा शुक्रवार को वापस बांक गांव लौटेगी।

इसके बाद मां नंदा की देव डोली छह माह के प्रवास के लिए सिद्धपीठ देवराड़ा के गर्भगृह में विराजमान होगी।

वाण से कैलास की ओर बढ़ती मां नंदा की डोली के साथ हजारों कदम चल रहे हैं… जयकारों के बीच विदाई हो रही है… आंखों में आंसू हैं, लेकिन मन में मां नंदा के प्रति अटूट आस्था है।

यही है हिमालय की वह लोकपरंपरा, जहां यात्रा सिर्फ रास्तों पर नहीं चलती—बल्कि पीढ़ियों से लोगों के दिलों में भी चलती आ रही है।

रिपोर्टिंग: महिपाल सिंह नेगी | नंदा न्यूज़

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