ब्रेकिंग न्यूज़

बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारों से गूंजा देहरादून, मुख्यमंत्री आवास कूच पर अड़े सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के पदयात्री,

ढाई सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद हाथीबड़कला में पुलिस ने रोका रास्ता, बैरिकेडिंग के सामने धरने पर बैठे आंदोलनकारी; शासन के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता और मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय दिलाने का दिया गया आश्वासन,

देहरादून/कर्णप्रयाग। चमोली जनपद के सिमली में बेस अस्पताल की मांग को लेकर शुरू हुआ जनआंदोलन मंगलवार, 20 अक्टूबर को राजधानी देहरादून पहुंच गया। ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के बुलंद नारों के साथ सिमली से निकली सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति की पदयात्रा लगभग ढाई सौ किलोमीटर का सफर पैदल तय कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ी, लेकिन आवास से करीब पांच सौ मीटर पहले हाथीबड़कला में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर आंदोलनकारियों का रास्ता रोक दिया। अपनी मांग को लेकर लंबी दूरी तय करके पहुंचे पदयात्री मुख्यमंत्री से मुलाकात और अस्पताल के संबंध में ठोस शासनादेश जारी किए जाने की मांग पर अड़े रहे।

सिमली क्षेत्र में बेस अस्पताल की स्थापना और उसके विधिवत संचालन की मांग को लेकर निकाली गई इस पदयात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि अस्पताल के लिए भवन और अन्य व्यवस्थाओं की दिशा में काम होने के बावजूद शासनादेश जारी नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाओं का अपेक्षित लाभ स्थानीय जनता को नहीं मिल पा रहा है। समिति की मांग है कि सरकार अस्पताल के संचालन के लिए आवश्यक शासनादेश जारी करे, ताकि चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की तैनाती का रास्ता साफ हो सके। इसी मांग को लेकर समिति ने आंदोलन को राजधानी तक पहुंचाने का निर्णय लिया था।

गांधी पार्क में रोकने के बाद भी मुख्यमंत्री आवास कूच पर अड़े रहे पदयात्री

राजधानी पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने सबसे पहले पदयात्रियों को गांधी पार्क में रोककर समिति के पदाधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने समिति के अध्यक्ष से वार्ता करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं उनसे मिलने के लिए यहां आ सकते हैं। प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का भरोसा देने का प्रयास किया गया, लेकिन पदयात्रियों की मांग स्पष्ट रही कि उन्हें मुख्यमंत्री आवास तक कूच करने दिया जाए, ताकि वे अपनी मांग सीधे सरकार के समक्ष रख सकें।

समिति के पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद आंदोलनकारी गांधी पार्क से आगे बढ़ते हुए राजपुर रोड और हाथीबड़कला की ओर मुख्यमंत्री आवास के लिए रवाना हो गए। आंदोलनकारियों के आगे बढ़ने पर पुलिस प्रशासन ने हाथीबड़कला पुलिस चौकी के समीप बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। यहां पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच एक बार फिर बातचीत हुई, लेकिन पदयात्री मुख्यमंत्री आवास तक जाने की मांग पर अड़े रहे।

बैरिकेडिंग के सामने धरने पर बैठे आंदोलनकारी, पुलिस वाहनों से हटाया गया

 

मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने का रास्ता बंद किए जाने के बाद पदयात्री बैरिकेडिंग के सामने ही धरने पर बैठ गए। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने और वार्ता के जरिए आगे की कार्रवाई तय करने का प्रयास किया, लेकिन जब आंदोलनकारी वहां से हटने के लिए तैयार नहीं हुए तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें पुलिस वाहनों में बैठाकर मौके से हटाया।

करीब ढाई सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर राजधानी पहुंचे आंदोलनकारियों के लिए यह स्थिति उनके आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई। समिति का उद्देश्य मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाना और सिमली बेस अस्पताल के संबंध में स्पष्ट निर्णय प्राप्त करना है। आंदोलनकारियों की नाराजगी का प्रमुख कारण यह है कि उनके अनुसार, केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा; अस्पताल के संचालन के लिए ठोस सरकारी आदेश जारी होना जरूरी है।

शासन के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता और मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन

पुलिस प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया गया कि शासन का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा और उनकी मांगों एवं समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। साथ ही, संभव होने पर मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय दिलाने का भी प्रयास किए जाने की बात कही गई।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आंदोलनकारियों से कब और किस स्तर पर वार्ता करती है। क्या समिति को मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात का अवसर मिलेगा? क्या सिमली बेस अस्पताल के संचालन को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने आएगा? या आंदोलनकारियों को एक बार फिर आश्वासन के सहारे लौटना पड़ेगा? इन सवालों के जवाब आगे की वार्ता और शासन के निर्णय पर निर्भर करेंगे।

पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा सवाल

सिमली बेस अस्पताल का मुद्दा केवल एक अस्पताल के निर्माण या संचालन तक सीमित नहीं है। यह चमोली जनपद के उन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता से भी जुड़ा है, जहां गंभीर बीमारी, दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूरस्थ अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। स्थानीय जनता की अपेक्षा है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और दूर जाने की मजबूरी कम हो।

‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ का नारा देकर राजधानी तक पहुंची संघर्ष समिति ने सरकार के सामने अपना संदेश स्पष्ट कर दिया है। अब आंदोलनकारियों को शासन की ओर से होने वाली वार्ता और किसी ठोस निर्णय का इंतजार है। पदयात्रा के जरिए उठाया गया यह सवाल आने वाले समय में सरकार की प्रतिक्रिया और सिमली बेस अस्पताल के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

नंदा न्यूज़ की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। शासन और संघर्ष समिति के बीच होने वाली वार्ता, मुख्यमंत्री से मुलाकात तथा अस्पताल को लेकर सामने आने वाले आधिकारिक निर्णय की जानकारी मिलने पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *