देवभूमि में गूंजेगी ‘भैरव वाणी’ की आवाज, सनातन संस्कृति और जनसरोकारों को समर्पित नए मीडिया मंच का भव्य आगाज
‘सत्य, संस्कृति, संचार — देवभूमि उत्तराखंड की आवाज’ के संकल्प के साथ शुरू हुई नई मीडिया यात्रा, संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी में हुआ शुभारंभ
नंदा न्यूज़ : देहरादून
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक चेतना और आमजन के अधिकारों एवं सरोकारों को बुलंद आवाज देने के संकल्प के साथ एक नए मीडिया मंच ‘भैरव वाणी’ पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल का भव्य शुभारंभ हुआ। हरिद्वार बाईपास रोड स्थित भैरव सेना कार्यालय में आयोजित गरिमामयी समारोह में धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। ‘सत्य, संस्कृति, संचार — देवभूमि उत्तराखंड की आवाज’ के ध्येय वाक्य के साथ शुरू हुई यह पहल प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता और जनहित के मुद्दों को व्यापक मंच देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
कार्यक्रम का आयोजन भैरव सेना के तत्वावधान में किया गया। समारोह में संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने सहभागिता कर इस नई मीडिया यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
*संत-महंतों के सान्निध्य में हुआ शुभारंभ*
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में निरंजनी अखाड़े के श्री महंत स्वामी दर्शन भारती जी उपस्थित रहे। उनके सान्निध्य ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर निगम देहरादून के पार्षद राकेश पंडित एवं भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने प्रतिभाग किया। वहीं राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र बॉबी की उपस्थिति ने भी आयोजन को विशेष पहचान दी।
अतिथियों ने ‘भैरव वाणी’ की शुरुआत को देवभूमि के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनहित से जुड़े विषयों को सामने लाने की दिशा में एक नई पहल बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मीडिया मंच उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान, धार्मिक विरासत और आम नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने में सार्थक भूमिका निभाएगा।
*पत्रकारिता को बनाया जाएगा जनआवाज का माध्यम : संदीप खत्री*
इस अवसर पर ‘भैरव वाणी’ पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल के मुख्य संपादक संदीप खत्री ने मंच की स्थापना के पीछे की सोच, उद्देश्य और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘भैरव वाणी’ केवल समाचारों के प्रकाशन तक सीमित रहने वाला मंच नहीं होगा, बल्कि समाज, संस्कृति और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने का प्रयास करेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी क्षेत्र की समस्या, आम नागरिक की पीड़ा, धार्मिक विषय अथवा सामाजिक सरोकारों को पूरी गंभीरता और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन सवालों को भी सामने लाना है जिनका जवाब जनता शासन और प्रशासन से चाहती है।
मुख्य संपादक ने यह भी बताया कि पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों और संबंधित शासकीय पंजीकरण संबंधी प्रावधानों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से संचालित किए जाने की दिशा में कार्य करेगा।
चार प्रमुख स्तंभों पर खड़ी होगी ‘भैरव वाणी’ की पत्रकारिता
‘भैरव वाणी’ ने अपनी मीडिया यात्रा के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं।
पहली प्राथमिकता तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जमीनी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है, ताकि वास्तविक घटनाओं और जनसमस्याओं को सही स्वरूप में समाज के सामने रखा जा सके।
दूसरी प्राथमिकता देवभूमि उत्तराखंड की पौराणिक विरासत, सनातन परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर है।
तीसरी प्राथमिकता प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों, गांवों और सीमांत इलाकों की उन समस्याओं एवं गतिविधियों को प्रमुखता देना है, जो अक्सर बड़े मीडिया मंचों तक नहीं पहुंच पातीं।
चौथी और महत्वपूर्ण प्राथमिकता समाज के हितों, जनसमस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाकर जिम्मेदार व्यवस्था का ध्यान आकर्षित करना है।
*भैरव सेना के पदाधिकारियों की रही महत्वपूर्ण भागीदारी*
इस शुभारंभ समारोह में भैरव सेना के संगठनात्मक पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार, केंद्रीय सचिव संजय पवार, प्रदेश अध्यक्ष युवा मोर्चा मयंक मलेठा तथा प्रदेश संगठन मंत्री गणेश जोशी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वहीं सामाजिक संस्था ‘देवभूमि भैरव वाहिनी’ की समर्पित कार्यकर्ताओं गौरी कोठियाल, गीता बिष्ट, सुनीता थापा एवं लक्ष्मी थापा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। उनकी उपस्थिति ने आयोजन में महिला शक्ति की भागीदारी को भी रेखांकित किया।
*पर्वतीय अंचलों की आवाज को मिलेगा मंच, जनहित के सवालों पर रहेगी नजर*
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आज भी अनेक गांव बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क, शिक्षा, रोजगार और पलायन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय मीडिया की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ‘भैरव वाणी’ ने अपने उद्देश्यों के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों की आवाज को सामने लाने और स्थानीय मुद्दों को व्यापक पहचान दिलाने का संकल्प व्यक्त किया है।
विशेष रूप से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और सामाजिक एकजुटता से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देना इस मंच की महत्वपूर्ण कार्ययोजना का हिस्सा बताया गया है।
*नई शुरुआत, बड़ी जिम्मेदारी*
‘भैरव वाणी’ पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल का शुभारंभ केवल एक नए मीडिया संस्थान की शुरुआत नहीं, बल्कि अपने घोषित उद्देश्यों के अनुरूप समाज के बीच एक नई जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी है। किसी भी मीडिया संस्थान की वास्तविक पहचान उसके नाम या उद्घाटन समारोह की भव्यता से नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता, विश्वसनीयता, निर्भीकता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता से बनती है।
अब देखना होगा कि ‘भैरव वाणी’ अपने ‘सत्य, संस्कृति और संचार’ के संकल्प को धरातल पर किस तरह साकार करता है और देवभूमि उत्तराखंड के आम नागरिकों, ग्रामीण अंचलों तथा सांस्कृतिक विरासत की आवाज बनकर किस प्रकार अपनी अलग पहचान स्थापित करता है।
