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नारायणबगड़ के प्रधान संगठन ने भरी हुंकार, अपनी मांगों को लेकर भराड़ीसैंण रवाना हुए पंचायत प्रतिनिधि,

दस सूत्रीय मांगों पर फैसला नहीं, अब भराड़ीसैंण विधानसभा का घेराव करेंगे ग्राम प्रधान,

नारायणबगड़ के प्रधान संगठन ने भरी हुंकार, अपनी मांगों को लेकर भराड़ीसैंण रवाना हुए पंचायत प्रतिनिधि,

नारायणबगड़/गैरसैंण। उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों की दस सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। प्रदेश प्रधान संगठन के आह्वान पर आज, 27 अक्टूबर को भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखंड विधानसभा के घेराव के लिए विकासखंड नारायणबगड़ के ग्राम प्रधान भी रवाना हो रहे हैं। प्रधान संगठन का कहना है कि पिछले महीने से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पंचायत प्रतिनिधियों को अब तक ठोस निर्णय का इंतजार है।

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर 2026 को प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों ने देहरादून में परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच किया था। इस दौरान ग्राम प्रधानों ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। इसके बाद शासन स्तर पर ग्राम प्रधानों की मांगों के परीक्षण के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति में सचिव, पंचायती राज को अध्यक्ष तथा सचिव, वित्त, सचिव, ग्राम्य विकास और निदेशक, पंचायती राज को शामिल किया गया था।

लेकिन प्रधान संगठन का कहना है कि समिति गठित होने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। इसी के विरोध में अब विधानसभा सत्र के दौरान भराड़ीसैंण में घेराव का कार्यक्रम रखा गया है, ताकि पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं को सरकार के सामने फिर से मजबूती के साथ रखा जा सके।

प्रधान संगठन की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करना, मनरेगा में पहाड़ी क्षेत्रों की नेटवर्क संबंधी समस्याओं को देखते हुए ऑफलाइन उपस्थिति की व्यवस्था, श्रमिकों की मजदूरी में वृद्धि, ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय अधिकार देना, पंचायतों को विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था बनाने तथा पंचायत राज विभाग के 29 विषयों को पंचायतों को हस्तांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

अब सबकी निगाहें भराड़ीसैंण में होने वाले इस प्रदर्शन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या विधानसभा सत्र के दौरान ग्राम प्रधानों की दस सूत्रीय मांगों पर कोई ठोस पहल होगी, या पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी मांगों के लिए आगे भी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?

नंदा न्यूज़ की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

रिपोर्ट: महिपाल सिंह नेगी | नंदा न्यूज़

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