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“बोन एंड जॉइंट वीक-2026: दून ग्लोबल स्कूल में छात्रों को स्वस्थ हड्डियों और सही पोश्चर का दिया गया संदेश”

रिपोर्ट: महिपाल सिंह नेगी, नंदा न्यूज़, देहरादून

देहरादून। इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा मनाए जा रहे बोन एंड जॉइंट वीक-2026 के अंतर्गत गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा के अस्थि रोग विभाग की ओर से दून ग्लोबल स्कूल, झाझरा में “वन स्कूल–वन ऑवर–वन हेल्दीयर फ्यूचर” विषय पर एक विशेष जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को हड्डियों एवं जोड़ों के स्वास्थ्य, सही शारीरिक मुद्रा (पोश्चर), संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने भाग लिया। सेमिनार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्चों को हड्डियों की मजबूती, रीढ़ की सुरक्षा तथा डिजिटल युग में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल के अस्थि रोग विभाग के सहायक आचार्य एवं पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. क्यूरी शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। लंबे समय तक गलत तरीके से बैठकर मोबाइल या लैपटॉप चलाने के कारण गर्दन, पीठ और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को सही तरीके से बैठने, खड़े होने और पढ़ाई करने की आदत विकसित करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, खेलकूद, योग तथा कैल्शियम एवं विटामिन-डी युक्त संतुलित आहार स्वस्थ हड्डियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यदि बचपन से ही अच्छी आदतें अपनाई जाएं तो भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस, जोड़ों के दर्द तथा रीढ़ संबंधी कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि बचपन और किशोरावस्था हड्डियों के विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान उचित पोषण और शारीरिक गतिविधियां जीवनभर मजबूत हड्डियों की नींव रखती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को हड्डियों से जुड़ी सामान्य समस्याओं, खेलते समय लगने वाली चोटों में प्राथमिक उपचार तथा समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

सेमिनार के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न प्रश्न पूछे। बच्चों ने मोबाइल के अधिक उपयोग, खेल के दौरान लगने वाली चोटों, कमर दर्द, रीढ़ की समस्याओं और हड्डियों को मजबूत बनाने वाले आहार से जुड़े सवाल किए, जिनका डॉ. शर्मा ने सरल और वैज्ञानिक तरीके से उत्तर दिया। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्यावहारिक सुझावों को विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बेहद उपयोगी बताया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या कमांडर मोनिका पांडे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों के बीच स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं और भविष्य में होने वाली हड्डियों एवं जोड़ों की समस्याओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सुभारती अस्पताल एवं चिकित्सा महाविद्यालय की टीम का आभार भी व्यक्त किया।

गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल के प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. प्रशान्त कुमार भटनागर ने कहा कि संस्थान केवल गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं ही नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि बोन एंड जॉइंट वीक-2026 के दौरान विभिन्न विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों तथा समुदायों में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हों।

उन्होंने कहा कि बच्चों में सही स्वास्थ्य संबंधी आदतें विकसित करना भविष्य के स्वस्थ समाज की आधारशिला है और इसी उद्देश्य के साथ संस्थान समाज के हर वर्ग तक स्वास्थ्य शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में अस्पताल की मार्केटिंग एवं पब्लिसिटी टीम के श्री जमाल मिर्जा एवं श्री सौरभ डोगरा का विशेष सहयोग रहा। विद्यालय परिवार एवं अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यार्थी कम उम्र से ही सही पोश्चर, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी अनेक गंभीर बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। यही संदेश इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया।

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