सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति
अध्यक्ष मुन्ना सिंह नेगी की ओर से पदयात्रियों एवं प्रवासी उत्तराखंडियों के नाम संदेश
जय मां चंडिका! जय उत्तराखंड!
मेरे सभी सम्मानित पदयात्री साथियों, मातृशक्ति, बुजुर्गों, युवाओं, सिमली क्षेत्र की जनता और देश-विदेश में रहने वाले हमारे प्रवासी उत्तराखंडी भाइयों-बहनों को मेरा सादर प्रणाम।
मैं, मुन्ना सिंह नेगी, अध्यक्ष सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति, आज आप सभी से कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहता हूं।
11 अक्टूबर को मां चंडिका के पावन दरबार सिमली से हमने जिस संकल्प के साथ पदयात्रा शुरू की थी, वह किसी व्यक्ति, पार्टी या राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं थी। यह पदयात्रा हमारे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था, हमारी माताओं-बहनों, बुजुर्गों, गरीब परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए थी।
हमने सैकड़ों किलोमीटर की कठिन यात्रा पैदल तय की। रास्ते में कठिनाइयां आईं, थकान हुई, लेकिन हमारे कदम नहीं रुके। क्योंकि हमारे दिल में एक ही आवाज थी—“बेस नहीं तो वोट नहीं!”
20 अक्टूबर को जब हम देहरादून में मुख्यमंत्री आवास से लगभग 500 मीटर पहले पहुंचे, तो हमारी इच्छा थी कि प्रदेश के मुख्यमंत्री से हमारी मुलाकात हो और सिमली बेस अस्पताल का शासनादेश जारी करने की मांग पर स्पष्ट निर्णय मिले।
साथियों, सिमली में बेस अस्पताल का बोर्ड लग चुका है, लेकिन हमारा सवाल आज भी वही है—जब तक शासनादेश जारी नहीं होता और अस्पताल विधिवत संचालित नहीं होता, तब तक क्षेत्र की जनता को इसका वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा?
हम मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन हमें आगे जाने से रोक दिया गया। हमारा आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने हमें जबरन गाड़ियों में बैठाया और एक ऐसे स्थान पर छोड़ दिया, जहां बैठने, सोने और भोजन की समुचित व्यवस्था तक नहीं थी। वहां की परिस्थितियों ने हमें काफी परेशान किया। हम इस पूरे घटनाक्रम से दुखी जरूर हैं, लेकिन हमारा संकल्प आज भी अडिग है।
मैं अपने उन सभी साथियों का दिल से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने इस यात्रा में अपना समय, श्रम और साहस लगाया। उन माताओं-बहनों, बुजुर्गों, युवाओं और हर उस व्यक्ति का आभार, जिसने हमारे संघर्ष को अपना संघर्ष समझा।
देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हमारे प्रवासी उत्तराखंडी भाइयों-बहनों का विशेष धन्यवाद। आपने फोन के माध्यम से, संदेशों के जरिए और अपने समर्थन से हमें लगातार हौसला दिया। आपका यह सहयोग हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
जब विपरीत परिस्थितियों में हम अपने साथियों से दूर थे, तब साथियों के फोन आए और उन्होंने हमें वापस लौटकर आगे की रणनीति बनाने का आग्रह किया। हम अपने साथियों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। अब आगे की लड़ाई आपसी विचार-विमर्श, एकजुटता और ठोस रणनीति के साथ लड़ी जाएगी।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से जनता को उम्मीद रहती है कि वे जनहित के मुद्दों पर आगे आएंगे। हमें अपेक्षा थी कि हमारे क्षेत्र के विधायक इस आंदोलन में हमारा समर्थन करेंगे और हमसे संपर्क कर हमारी मांग को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे। लेकिन हमारे अनुभव में हमें वह समर्थन और संवाद नहीं मिला, जिसकी हमें उम्मीद थी। हमारा उद्देश्य किसी से व्यक्तिगत विरोध करना नहीं, बल्कि जनता के सवाल का जवाब और समाधान प्राप्त करना है।
साथियों, हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमारी लड़ाई सिमली बेस अस्पताल के शासनादेश, अस्पताल के विधिवत संचालन और क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए है।
हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे। हम शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संगठित तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। आगे की रणनीति समिति और साथियों के साथ विचार-विमर्श करके तय की जाएगी।
मैं सभी पदयात्रियों और प्रवासी उत्तराखंडियों से अपील करता हूं कि आपसी एकता बनाए रखें, किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और समिति के आधिकारिक संदेशों पर भरोसा करें।
अंत में, मैं मां चंडिका से प्रार्थना करता हूं कि हमें अपने संकल्प पर अडिग रहने की शक्ति दें।
हमारा संघर्ष किसी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, अपने क्षेत्र के भविष्य के लिए है।
हमारी मांग स्पष्ट है—सिमली बेस अस्पताल का शासनादेश जारी हो, अस्पताल विधिवत संचालित हो और जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिले।
जब तक हमारी मांग पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक हमारी आवाज शांत नहीं होगी।
बेस नहीं तो वोट नहीं!
जय मां चंडिका! जय उत्तराखंड!
आपका अपना, मुन्ना सिंह नेगी अध्यक्ष, सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति

