कैबिनेट बैठक पर टिकी संघर्ष समिति की निगाहें, शासनादेश जारी हुआ तो जताएंगे मुख्यमंत्री का आभार; नहीं हुआ तो तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति,
देहरादून। बेस नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ चमोली जिले के सिमली स्थित मां चंडिका के पावन धाम से 11 अक्टूबर को शुरू हुई सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति की पदयात्रा अब राजधानी देहरादून में अपने निर्णायक पड़ाव पर है। करीब 250 किलोमीटर से अधिक का पैदल सफर तय कर 20 अक्टूबर को देहरादून पहुंचे पदयात्रियों को मुख्यमंत्री आवास से करीब 500 मीटर पहले रोक दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने पदयात्रियों को बसों में बैठाकर एकता विहार, सहस्रधारा रोड स्थित धरना स्थल पर पहुंचाया। यहां आंदोलनकारी पिछले तीन दिनों से अपनी मांग को लेकर डटे हुए हैं।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी अब कैबिनेट बैठक में होने वाले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। नंदा न्यूज़ के रिपोर्टर ने समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संरक्षक से बातचीत कर आंदोलन की वर्तमान स्थिति और आगे की रणनीति के बारे में जानकारी ली।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि कैबिनेट बैठक में सिमली बेस अस्पताल के संबंध में शासनादेश जारी हो जाता है, तो यह क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। इसके लिए संघर्ष समिति मुख्यमंत्री का आभार और धन्यवाद व्यक्त करेगी तथा इसके बाद पदयात्री सिमली के लिए रवाना हो जाएंगे। वहीं, यदि कैबिनेट बैठक में शासनादेश जारी नहीं होता है, तो बैठक समाप्त होने के बाद समिति के पदाधिकारी आपस में विचार-विमर्श कर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।
पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर निकली पदयात्रा,

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के आह्वान पर 11 अक्टूबर को मां चंडिका मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पदयात्रा शुरू हुई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित कराने और पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को सरकार तक पहुंचाना है।
पदयात्रा में विभिन्न गांवों के लोगों ने भागीदारी की।
आंदोलनकारियों ने रास्ते में कई पड़ाव पार करते हुए देहरादून तक पैदल सफर तय किया। इस दौरान बेस नहीं तो वोट नहीं का नारा आंदोलन की प्रमुख आवाज बना रहा। समिति का कहना है कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
अस्पताल के पूर्ण संचालन के लिए शासनादेश की मांग:
पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। गंभीर बीमारी, दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूरस्थ शहरों की ओर जाना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को समय, धन और संसाधनों से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
संघर्ष समिति की मांग है कि सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए शासनादेश जारी किया जाए और अस्पताल में आवश्यक चिकित्सकों, चिकित्सा कर्मचारियों तथा जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। समिति का मानना है कि अस्पताल के पूर्ण संचालन से सिमली और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
कैबिनेट के फैसले के बाद तय होगी आगे की राह:
एकता विहार, सहस्रधारा रोड स्थित धरना स्थल पर डटे पदयात्रियों की निगाहें अब सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। समिति ने स्पष्ट किया है कि शासनादेश जारी होना उनके आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है। यदि मांग पूरी होती है, तो मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त कर पदयात्री वापस लौटेंगे। यदि निर्णय उनके पक्ष में नहीं आता है, तो कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अब सवाल यह है कि क्या कैबिनेट बैठक में सिमली बेस अस्पताल के संबंध में शासनादेश जारी करने का निर्णय लिया जाएगा या आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष समिति को नई रणनीति बनानी पड़ेगी। फिलहाल पदयात्री एकता विहार में डटे हुए हैं और अपने संघर्ष के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
नंदा न्यूज़ | देहरादून
