*उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा को आज एक साल पूरा हो चुका है। 5 अगस्त की वह सुबह आज भी लोगों के जेहन में एक दर्दनाक याद बनकर जिंदा है*
*मलबे से भरा इलाका, टूटे मकान, क्षतिग्रस्त होटल और दुकानें*
*इस आपदा में 115 मकान और 116 होटल-दुकानें पूरी तरह तबाह हो गई थीं। कई परिवार बेघर हो गए और वर्षों की मेहनत कुछ ही पलों में मलबे में बदल गई*
*कल्प केदार मंदिर का वर्तमान दृश्य और आसपास जमा मलबा*
*आपदा की सबसे बड़ी निशानी आज भी कल्प केदार मंदिर है, जो करीब 25 फीट मलबे के नीचे दबा हुआ है। एक साल बाद भी मंदिर को पूरी तरह बाहर नहीं निकाला जा सका है*
*तेलगाड़, कृत्रिम झील और खीर गंगा नदी के दृश्य*
*तेलगाड़ में बनी कृत्रिम झील और खीर गंगा का बढ़ता जलस्तर आज भी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों को भविष्य में फिर किसी बड़ी आपदा का डर सता रहा है*
*खेतों में काम करते किसान, सेब और नकदी फसलों के दृश्य*
*हालांकि, धराली के लोगों ने हार नहीं मानी। किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, ताकि अपनी आजीविका को फिर से मजबूत बना सकें*
*युवा पर्यटकों के साथ ट्रैकिंग करते हुए, गाइडिंग करते हुए*
*क्षेत्र के युवा भी स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। ट्रैकिंग और ट्रैवल गाइड का काम अब कई परिवारों की नई उम्मीद बन चुका है*
“धराली आपदा को आज एक साल पूरा हो गया है। एक साल पहले 5 अगस्त को आई विनाशकारी आपदा ने उत्तरकाशी के धराली की तस्वीर ही बदल दी थी। लेकिन आज सवाल है—क्या एक साल बाद धराली पूरी तरह संभल पाया है? आइए देखते हैं
महिपाल सिंह नेगी की यह खास रिपोर्ट।”
उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा को आज एक साल पूरा हो चुका है। 5 अगस्त 2025 को आई इस तबाही ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। सैकड़ों परिवारों के सपने मलबे में दब गए, घर, होटल और दुकानें देखते ही देखते मिट्टी में समा गईं और कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
आपदा में 115 मकान और 116 होटल व दुकानें पूरी तरह ध्वस्त हो गई थीं। आज भी उस दर्द की यादें लोगों के दिलों में ताजा हैं। सबसे दुखद तस्वीर ऐतिहासिक कल्प केदार मंदिर की है, जो करीब 25 फीट मलबे के नीचे दबा हुआ है। एक साल बीत जाने के बाद भी मंदिर को बाहर नहीं निकाला जा सका है।
धराली के लोगों ने हार नहीं मानी। जिनकी रोजी-रोटी पर्यटन से जुड़ी थी, उन्होंने अब नए रास्ते तलाश लिए हैं। किसान नकदी फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि क्षेत्र के युवा ट्रैकिंग और ट्रैवल गाइड के रूप में स्वरोजगार अपनाकर अपने परिवारों का सहारा बन रहे हैं।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के इंतजाम अब भी अधूरे हैं। तेलगाड़ में बनी कृत्रिम झील और खीर गंगा नदी का बढ़ता खतरा आज भी लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में फिर ऐसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन के अनुसार 21 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तटबंध और सुरक्षा दीवार निर्माण की योजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, आपदा के कारणों पर अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है।
एक साल बाद भी धराली के जख्म पूरी तरह नहीं भरे हैं। लेकिन मुश्किल हालात के बीच यहां के लोगों का हौसला आज भी कायम है। उम्मीद है कि पुनर्वास, सुरक्षा और विकास के कार्य जल्द पूरे होंगे और धराली एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान हासिल करेगा।
महिपाल सिंह नेगी, नंदा न्यूज, उत्तरकाशी।

