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“चमोली नारायणबगड़” : ‘मांगल गर्ल’ नंदा सती को मिलेगा तीलू रौतेली राज्य स्त्री शक्ति पुरस्कार, लोक संस्कृति को मिला बड़ा सम्मान”

रिपोर्ट : महिपाल सिंह नेगी, नारायणबगड़, जनपद चमोली | नंदा न्यूज़

चमोली जनपद और पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व की खबर है। पिंडर घाटी की बेटी और प्रदेशभर में ‘मांगल गर्ल’ के नाम से प्रसिद्ध युवा लोक कलाकार *नंदा सती* का चयन इस वर्ष के प्रतिष्ठित तीलू रौतेली राज्य स्त्री शक्ति पुरस्कार के लिए किया गया है। उन्हें 8 अगस्त को देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सम्मानित करेंगे। यह सम्मान उत्तराखंड की लोक संस्कृति, मांगल गीतों और मां नंदा के लोकगीतों के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।

उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष महिलाओं के उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने के उद्देश्य से तीलू रौतेली राज्य स्त्री शक्ति पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष प्रदेश के सभी 13 जनपदों से एक-एक महिला का चयन किया गया है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह सम्मान उन महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने अपने साहस, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण से नई पहचान बनाई है। चमोली जनपद के लिए यह गौरव का विषय है कि इस बार जिले का प्रतिनिधित्व *नंदा सती* करेंगी।

नारायणबगड़ ब्लॉक के नारायणबगड़ गांव की रहने वाली *नंदा सती* बचपन से ही लोक संस्कृति के वातावरण में पली-बढ़ीं। उनके पिता ब्रह्मानंद सती पंडिताई का कार्य करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार से मिले संस्कारों और गांव के पारंपरिक माहौल ने उन्हें छोटी उम्र से ही मांगल गीतों, लोक परंपराओं और मां नंदा की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ दिया। यही लगाव आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन गया।

नंदा सती ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नारायणबगड़ में पूरी की। इसके बाद उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर से स्नातक तथा संगीत विषय में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वह संगीत विषय में पीएचडी कर रही हैं और विश्वविद्यालय में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।

आज जब अधिकांश युवा आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया की दुनिया में व्यस्त हैं, उस समय नंदा सती ने अपनी ऊर्जा उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में लगाई। उन्होंने मांगल गीतों को केवल मंचों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गांव-गांव जाकर महिलाओं, युवाओं और बच्चों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज तक वह हजारों लोगों को मांगल गीतों और लोक संगीत का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनकी मधुर आवाज, हारमोनियम पर सधी प्रस्तुति और लोक परंपराओं की गहरी समझ ने उन्हें पूरे उत्तराखंड में ‘मांगल गर्ल’ की पहचान दिलाई है।

नंदा सती की उपलब्धियां केवल लोक संगीत तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2023 में संगीत विषय में स्नातकोत्तर की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ। यह सम्मान उनकी शैक्षणिक प्रतिभा और संगीत साधना का राष्ट्रीय स्तर पर मिला महत्वपूर्ण प्रमाण है।

कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब सांस्कृतिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई थीं, तब भी नंदा सती ने अपनी मुहिम नहीं रोकी। उन्होंने फेसबुक लाइव, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए मांगल गीतों की प्रस्तुतियां दीं और ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर युवाओं तथा बच्चों को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ने का कार्य जारी रखा। उनकी इस पहल को प्रदेशभर में सराहना मिली।

पिछले लगभग एक दशक से नंदा सती हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा के जागरों और लोकगीतों के संरक्षण में लगातार कार्य कर रही हैं। आगामी नंदा देवी राजजात यात्रा से पहले वह मां नंदा के जागरों और पारंपरिक लोकगीतों का विशेष संगीत संग्रह भी जारी करने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक स्मृति, इतिहास और पहचान हैं।

नंदा सती का तीलू रौतेली राज्य स्त्री शक्ति पुरस्कार के लिए चयन इस बात का प्रमाण है कि यदि युवा अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहें, तो वे राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं। उनकी सफलता उत्तराखंड की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।

पिंडर घाटी से उठी यह मधुर आवाज आज पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। नंदा सती ने यह साबित कर दिया है कि लोक संस्कृति की सेवा भी समाज की सबसे बड़ी सेवा है। नंदा न्यूज़ परिवार की ओर से उन्हें इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं।

रिपोर्ट : महिपाल सिंह नेगीनारायणबगड़, जनपद चमोलीनंदा न्यूज़

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