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*”बच्चों के सिर पर मंडरा रहा खतरा! जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर 32 छात्राएं”*

“बच्चों के सिर पर मंडरा रहा खतरा! जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर 32 छात्राएं”

*उपलब्धियों से प्रदेश तक स्कूल का नाम रोशन करने वाली छात्राओं के सामने अब सुरक्षित भवन का संकट — बारिश ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल*

चमोली | नारायणबगड़ | चौपता।

जनपद चमोली के विकासखंड नारायणबगड़ की ग्राम सभा चौपता स्थित “राजकीय कन्या जूनियर हाई स्कूल चौपता” इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है। जिस विद्यालय की छात्राओं ने ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर स्कूल और क्षेत्र का नाम रोशन किया, आज उसी विद्यालय की जर्जर हालत छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

विद्यालय में वर्तमान समय में करीब 32 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन बारिश के बाद स्कूल भवन की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। विद्यालय की छत कई जगहों से टूटकर गिर चुकी है। कमरों में बारिश का पानी भर गया है और दरवाजे भी क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं। ऐसे में स्कूल भवन में बच्चों की कक्षाएं संचालित करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने से कम नहीं है।

*दो-तीन दिन की बारिश ने बढ़ाई मुश्किल*

नंदा न्यूज के रिपोर्टर महिपाल सिंह नेगी ने जब ग्राम प्रधान चौपता श्रीमती *उषा रावत* से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों में हुई तेज बारिश के कारण विद्यालय की छत कई जगहों से टूट गई है। बारिश का पानी पूरे कमरों में भर गया और विद्यालय के दरवाजे भी टूट चुके हैं।

ग्राम प्रधान के मुताबिक भवन की हालत ऐसी है कि छत कभी भी गिर सकती है, जिससे बच्चों और शिक्षकों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

“कई बार दे चुके हैं सूचना, सिर्फ आश्वासन मिले”

ग्राम प्रधान “उषा रावत” ने आरोप लगाया कि विद्यालय भवन की खराब स्थिति को लेकर पहले भी कई बार ब्लॉक प्रमुख, बेसिक शिक्षा अधिकारी, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन उनके अनुसार अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें केवल घोषणाओं और आश्वासनों से ही संतोष करना पड़ा।

“तीन-चार साल से विभाग को अवगत करा रहे: प्रधानाचार्य”

विद्यालय के प्रधानाचार्य “महिपाल सिंह मेहरा” ने भी बताया कि भवन की स्थिति को लेकर विभाग को पिछले तीन-चार वर्षों से लगातार अवगत कराया जा रहा है। विद्यालय की ओर से फाइल तैयार कर भेजी गई और भवन की तस्वीरें भी विभाग तक पहुंचाई गईं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

प्रधानाचार्य का कहना है कि अब स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। बच्चों को पढ़ाने के लिए भवन में जाना ही जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है और जान-माल का नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

*उपलब्धियों की दीवार बता रही स्कूल की कहानी*

इस विद्यालय की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि एक ओर भवन जर्जर होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां पढ़ने वाले बच्चे लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।

विद्यालय के उपलब्धि रिकॉर्ड में इंस्पायर अवार्ड, विज्ञान दिवस, श्री देवसुमन छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय छात्रवृत्ति जैसी उपलब्धियां दर्ज हैं। छात्राओं ने ब्लॉक और जिला स्तर के साथ-साथ *प्रदेश स्तर* पर भी स्कूल का नाम रोशन किया है।

यानी जिस विद्यालय ने ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को मंच दिया, आज वही विद्यालय सुरक्षित भवन के लिए शासन-प्रशासन की ओर देख रहा है।

“व्यवस्था होने तक बच्चों को स्कूल भेजना सही है क्या ???”

ग्राम प्रधान उषा रावत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट कहा है कि जब तक शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग विद्यालय भवन की सुरक्षा की उचित व्यवस्था नहीं करता, तब तक बच्चों को ऐसे भवन में भेजना उचित होगा क्या।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी संभावित हादसे का इंतजार करेगा या फिर हादसा होने से पहले इस जर्जर विद्यालय भवन की सुध लेगा?

नंदा न्यूज की अपील:

बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यवस्था से ऊपर है। शासन-प्रशासन को तत्काल विद्यालय भवन का स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था और भवन के पुनर्निर्माण/मरम्मत के संबंध में ठोस कदम उठाने चाहिए।

रिपोर्ट — महिपाल सिंह नेगी

नंदा न्यूज | देवभूमि उत्तराखंड

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