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सिमली बेस अस्पताल की मांग पर सड़कों पर उतरे ग्रामीण, गोचर से रुद्रप्रयाग के लिए रवाना हुई पदयात्रा,

‘इस बार बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के साथ आंदोलन तेज, फूल-मालाओं से हुआ पदयात्रियों का स्वागत; मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

नंदा न्यूज़ | चमोली।

चमोली जनपद के सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। वर्षों से अस्पताल की मांग उठा रहे क्षेत्रीय ग्रामीणों ने अपने हक की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए सिमली से देहरादून तक पैदल कूच शुरू कर दिया है। 11 अक्टूबर को सिमली स्थित चंडिका मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद संघर्ष समिति के नेतृत्व में शुरू हुई यह पदयात्रा कंप्रयाग हुए गोचर पहुंची, जहां रात्रि विश्राम के बाद आज पदयात्री गोचर से रुद्रप्रयाग के लिए रवाना हो गए।

गोचर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने पदयात्रियों का फूल-मालाओं से स्वागत कर उनके आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के साथ चल रहे महिला-पुरुषों, बुजुर्गों और अन्य क्षेत्रवासियों के हौसले को समर्थन मिला। पदयात्रा के माध्यम से आंदोलनकारियों ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि अब अस्पताल की मांग को केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा।

वर्षों से इंतजार, अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान,

 

सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना की मांग क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा अहम मुद्दा है। संघर्ष समिति और ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें वर्षों से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन धरातल पर ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहे।

इसी नाराजगी के बीच पदयात्रियों ने ‘इस बार बेस नहीं तो वोट नहीं’ का नारा बुलंद किया है। यह नारा केवल राजनीतिक चेतावनी नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर पनप रहे असंतोष और जवाबदेही की मांग को भी सामने रखता है।

संघर्ष समिति और ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि इस बार उनकी मांग पर तत्काल ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना की दिशा में जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी।

स्वास्थ्य सुविधा का सवाल, सरकार के सामने बड़ी चुनौती,

 

पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और समय पर उपचार मिलना आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सिमली में बेस अस्पताल की मांग को क्षेत्रीय जरूरतों, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और आमजन की अपेक्षाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाए और अस्पताल की स्थापना को लेकर स्पष्ट निर्णय के साथ आगे की प्रक्रिया शुरू की जाए।

सिमली से देहरादून तक शुरू हुई यह पदयात्रा अब अलग-अलग पड़ावों से गुजरते हुए आगे बढ़ रही है। गोचर में मिले जनसमर्थन ने आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने का हौसला दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस जनआवाज पर क्या रुख अपनाती है और संघर्ष समिति की मांग पर कब तक ठोस पहल होती है।

नंदा न्यूज़ का सवाल: क्या सिमली बेस अस्पताल की वर्षों पुरानी मांग को अब ठोस निर्णय तक पहुंचाया जाएगा, या क्षेत्रवासियों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आगे भी सड़कों पर उतरना पड़ेगा? पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल एक मांग नहीं, बल्कि आमजन की बुनियादी जरूरत है। अब क्षेत्रीय जनता को सरकार की ओर से स्पष्ट और ठोस पहल का इंतजार है।

 

रिपोर्ट: नंदा न्यूज़, कर्णप्रयाग चमोली

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