दिल्ली मालवीय नगर अग्निकांड में उत्तराखंड के बेटे केशव नेगी जी की गिरफ्तारी ने अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई, नियमों का उल्लंघन हुआ या प्रशासनिक लापरवाही हुई, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। लेकिन किसी मेहनतकश व्यक्ति को ही पूरा दोषी ठहराकर मामले को खत्म करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आज उत्तराखंड का जनमानस यह जानना चाहता है कि आखिर प्रदेश सरकार, सांसद और जनप्रतिनिधि इस मामले में चुप क्यों हैं? क्या एक उत्तराखंडी युवक के न्याय की आवाज़ उठाना उनका दायित्व नहीं है?
यदि केशव नेगी जी को शीघ्र न्याय नहीं मिला और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की गई, तो उत्तराखंड के लोग लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेगें ।

