पेपर लीक के विरोध में *जंतर-मंतर* से संसद कूच के दौरान हुए प्रदर्शन ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन सामने आए दृश्य इस दावे पर बहस छेड़ रहे हैं।
लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का *संवैधानिक अधिकार* है, लेकिन यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प,पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश,सार्वजनिक निजी सम्पति को नुकसान पहुंचाना,
कानून-व्यवस्था प्रभावित होने या हिंसा जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
सरकार और प्रशासन को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करानी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने प्रदर्शन की आड़ में कानून हाथ में लिया है, हिंसा की है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, तो उसकी पहचान कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि कहीं अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सबसे अहम बात यह है कि जिस मुद्दे को लेकर छात्र सड़क पर उतरे—*यानी पेपर लीक*—उसके दोषियों पर भी बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। युवाओं का भविष्य राजनीति का नहीं, न्याय का विषय है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर देश की नजर बनी हुई है।
नंदा न्यूज के लिए मैं हूँ…*महिपाल सिंह नेगी*

