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बड़ी खबर: “नारायणबगड़-भगोती से केवर मोटर मार्ग को वन भूमि डायवर्जन की सैद्धांतिक मंजूरी”

बड़ी खबर: नारायणबगड़-भगोती से केवर मोटर मार्ग को वन भूमि डायवर्जन की सैद्धांतिक मंजूरी
चमोली। नारायणबगड़ क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नारायणबगड़-भगोती से केवर मोटर मार्ग के निर्माण का रास्ता अब एक कदम और साफ हो गया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून ने 7 अगस्त 2026 को जारी पत्र के माध्यम से इस सड़क परियोजना के लिए 0.44 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल यानी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
यह प्रस्ताव Online Proposal No. FP/UK/ROAD/458868/2024 के तहत उत्तराखंड सरकार की ओर से PARIVESH 2.0 पोर्टल पर भेजा गया था। प्रस्ताव के अनुसार यह सड़क नारायणबगड़-भगोती से केवर तक बनाई जानी है और इसका निर्माण सीडी, लोक निर्माण विभाग थराली के पक्ष में प्रस्तावित है। यह क्षेत्र बद्रीनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर, चमोली के अंतर्गत आता है।
मंत्रालय ने मंजूरी के साथ कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय शर्तें भी निर्धारित की हैं। इनमें सबसे प्रमुख शर्तों के तहत 0.88 हेक्टेयर सिविल सोयम भूमि, खसरा नंबर 2033, ग्राम चोपता में 968 पौधों का प्रतिपूरक वनीकरण किया जाना है। इसके लिए स्थानीय और देशज प्रजातियों को प्राथमिकता देने तथा गैर-देशज प्रजातियों के एकल रोपण से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को भी सीमित रखा गया है। मंत्रालय के आदेश के अनुसार डायवर्ट की जाने वाली वन भूमि पर अधिकतम 32 पेड़ों की कटाई की अनुमति है और पेड़ों की कटाई राज्य वन विभाग की कड़ी निगरानी में ही की जाएगी। साथ ही अधिकतम संभव संख्या में पेड़ों के ट्रांसलोकेशन की संभावना तलाशने के निर्देश भी दिए गए हैं।
परियोजना में पहाड़ी ढलानों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। निर्माण एजेंसी को आवश्यकता के अनुसार रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल और उचित ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। सड़क निर्माण से निकलने वाले मलबे और मिट्टी को निर्धारित डंपिंग साइट पर ही डाला जाएगा और किसी भी स्थिति में मलबे को पहाड़ी ढलानों पर नीचे की ओर बहने या गिरने नहीं दिया जाएगा।
प्राकृतिक जलधाराओं और नदियों पर बनने वाले पुलों व कलवर्ट को इस तरह डिजाइन करने के निर्देश हैं कि पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो, जलभराव की स्थिति पैदा न हो और वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वन भूमि का इस्तेमाल केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा, जिसके लिए मंजूरी मांगी गई है। वन क्षेत्र में मजदूर कैंप स्थापित नहीं किया जाएगा और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को वैकल्पिक ईंधन, प्राथमिकता के आधार पर LPG, उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी अंतिम मंजूरी नहीं है। मंत्रालय ने इसे Stage-I यानी इन-प्रिंसिपल अप्रूवल के रूप में जारी किया है। राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्धारित शर्तों की अनुपालना करनी होगी। अनुपालन रिपोर्ट मिलने के बाद ही Stage-II/Final Approval जारी किया जाएगा। आदेश में साफ कहा गया है कि अंतिम मंजूरी मिलने तक वन भूमि का हस्तांतरण प्रभावी नहीं होगा।
प्रतिपूरक वनीकरण की लागत, एनपीवी तथा अन्य निर्धारित राशि परियोजना प्राधिकरण को राज्य वन विभाग के पास जमा करनी होगी। प्रतिपूरक वनीकरण को 10 वर्षों तक बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है।
ऐसे में नारायणबगड़-भगोती से केवर मोटर मार्ग की दिशा में यह मंजूरी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रगति मानी जा रही है। अब परियोजना से जुड़े विभागों के सामने मंत्रालय द्वारा निर्धारित पर्यावरणीय और वन संबंधी शर्तों को पूरा कर अंतिम स्वीकृति प्राप्त करने की जिम्मेदारी होगी।
महिपाल सिंह नेगी, रिपोर्टिंग — नंदा न्यूज, देहरादून।
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