श्रीनगर में रात्रि विश्राम के बाद देवप्रयाग की ओर रवाना हुआ पदयात्रियों का जत्था, विधायक बोले—मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर उठाऊंगा अस्पताल का मुद्दा,
नंदा न्यूज़ | उत्तराखंड।
चमोली जनपद के सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के आह्वान पर मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए निकली पदयात्रा में शामिल जत्था श्रीनगर में रात्रि विश्राम के बाद अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पदयात्री श्रीनगर से कीर्तिनगर, मलेथा और मुलिया गांव होते हुए देवप्रयाग पहुंचेंगे, जहां आज रात्रि विश्राम किया जाएगा।
वर्षों से सिमली में बेस अस्पताल की मांग उठाई जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और गंभीर बीमारियों की स्थिति में मरीजों को दूरस्थ अस्पतालों तक ले जाने की चुनौती को देखते हुए स्थानीय लोग सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना को क्षेत्र की बड़ी जरूरत मानते हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार की ओर से सिमली में बेस अस्पताल का बोर्ड लगाया जा चुका है, लेकिन अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसी देरी के विरोध में समिति ने मुख्यमंत्री आवास तक पदयात्रा निकालकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का निर्णय लिया है।
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सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर जारी इस आंदोलन को थराली विधायक भूपाल राम टम्टा का भी समर्थन मिला है। विधायक ने संघर्ष समिति के पदयात्रियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने समिति को आश्वस्त किया कि वह इस मुद्दे पर हर समय उनके साथ खड़े हैं।
विधायक भूपाल राम टम्टा ने कहा कि सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना केवल संघर्ष समिति की मांग नहीं है, बल्कि यह उनके विधानसभा क्षेत्र के लिए भी बेहद जरूरी है। क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है और इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए।
विधायक ने बताया कि वह देहरादून जा रहे हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के दौरान सिमली बेस अस्पताल का मुद्दा अवश्य उठाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विषय पर तत्काल कार्रवाई करेंगे।
भूपाल राम टम्टा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर विश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार क्षेत्र की जरूरत को समझते हुए अस्पताल के शासनादेश के संबंध में शीघ्र सकारात्मक कदम उठाएगी। विधायक के समर्थन से संघर्ष समिति को अपनी मांग के समाधान की दिशा में राजनीतिक स्तर पर पहल की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
बोर्ड लगने के बाद शासनादेश में देरी क्यों?

संघर्ष समिति का प्रमुख सवाल है कि जब सिमली में बेस अस्पताल का बोर्ड लगाया जा चुका है, तो इसके शासनादेश में देरी क्यों हो रही है? समिति की मांग है कि शासनादेश तत्काल जारी किया जाए, ताकि अस्पताल की स्थापना की दिशा में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सके और क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुले।
सिमली बेस अस्पताल का मुद्दा केवल एक भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है। यह चमोली के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, आपातकालीन उपचार और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच से जुड़ा सवाल है। अस्पताल की स्थापना से क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों की ओर जाने की मजबूरी कम होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रही संघर्ष समिति की पदयात्रा और थराली विधायक का समर्थन इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें राज्य सरकार के रुख पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या इस पदयात्रा और जनप्रतिनिधि के समर्थन के बाद सिमली बेस अस्पताल के शासनादेश को लेकर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा?
नंदा न्यूज़ का सवाल—सिमली में बेस अस्पताल का बोर्ड लग चुका है, तो शासनादेश जारी करने में देरी क्यों? क्षेत्र की जनता अब आश्वासन से आगे बढ़कर ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।
