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रुद्रप्रयाग से श्रीनगर की ओर बढ़ी पदयात्रा अस्पताल का बोर्ड लगा, लेकिन शासनादेश अब तक जारी नहीं—संघर्ष समिति ने सरकार से पूछा, आखिर कब मिलेगा पहाड़ को बेस अस्पताल?

“बेस नहीं तो वोट नहीं!” सिमली बेस अस्पताल के लिए आर-पार की लड़ाई, रुद्रप्रयाग से श्रीनगर की ओर बढ़ी पदयात्रा,

अस्पताल का बोर्ड लगा, लेकिन शासनादेश अब तक जारी नहीं—संघर्ष समिति ने सरकार से पूछा, आखिर कब मिलेगा पहाड़ को बेस अस्पताल ?

‘ बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारों से गूंजा पहाड़! सिमली बेस अस्पताल के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीण, शासनादेश के लिए आर-पार की लड़ाई

रुद्रप्रयाग से श्रीनगर की ओर बढ़ी पदयात्रा, गुलाबराय पहुंचे आंदोलनकारी; अस्पताल का बोर्ड लगाने के बावजूद शासनादेश जारी न होने पर संघर्ष समिति ने उठाए सवाल

नंदा न्यूज़ | चमोली/रुद्रप्रयाग।

पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। चमोली जनपद के कर्णप्रयाग क्षेत्र में स्थित सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने और उसका शासनादेश तत्काल जारी करने की मांग को लेकर सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति की पदयात्रा आगे बढ़ रही है। गौचर से रुद्रप्रयाग पहुंची पदयात्रा अब श्रीनगर की ओर रवाना हो चुकी है। आंदोलनकारी गुलाबराय पहुंचकर सरकार से अपना हक मांग रहे हैं। पदयात्रा के दौरान ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे गूंज रहे हैं।

संघर्ष समिति की मांग स्पष्ट है—जब सिमली में बेस अस्पताल का बोर्ड लगा दिया गया है, तो उसके संचालन और पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने से संबंधित शासनादेश अब तक जारी क्यों नहीं हुआ? समिति का कहना है कि केवल बोर्ड लगा देने से क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान नहीं होगा। अस्पताल को विधिवत स्वीकृति, आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

बोर्ड लगा, लेकिन शासनादेश कहां? समिति ने सरकार से मांगा जवाब ?

सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल के रूप में संचालित करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। पूर्व में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल के बोर्ड पर नाम बदलकर बेस अस्पताल किए जाने के बावजूद शासनादेश जारी नहीं हुआ था। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और समुचित संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए !

संघर्ष समिति का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और शासन स्तर से आश्वासन मिलने के बाद भी मांग पूरी नहीं हुई है। इसी नाराजगी के चलते समिति ने पैदल देहरादून कूच करने का निर्णय लिया। समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में आंदोलनकारी अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

कमेंड़ा, शिवानंदी और रतूड़ा में ग्रामीणों ने किया स्वागत,

पदयात्रा को रास्ते में स्थानीय लोगों का समर्थन मिल रहा है। गौचर से रुद्रप्रयाग की ओर बढ़ते समय कमेंड़ा, शिवानंदी और रतूड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से पदयात्रियों का स्वागत किया। कहीं चाय-पानी की व्यवस्था की गई, तो कहीं जूस पिलाकर आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाया गया।

महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों की भागीदारी के साथ ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की। लोगों का समर्थन आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने का हौसला दे रहा है।

पहाड़ के मरीजों को बेहतर उपचार की उम्मीद,

सिमली बेस अस्पताल का मुद्दा सिर्फ एक भवन या बोर्ड तक सीमित नहीं है। यह चमोली और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, समय पर उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की जरूरत से जुड़ा सवाल है। अस्पताल का समुचित संचालन होने से क्षेत्रीय लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए सरकारी स्वीकृति के साथ चिकित्सकीय स्टाफ, जरूरी उपकरण और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता भी अहम होगी।

संघर्ष समिति शासनादेश जारी होने तक अपनी मांग को प्रमुखता से उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यही है कि सिमली बेस अस्पताल को लेकर उठ रही आवाज पर शासन कब निर्णय लेगा और क्षेत्रवासियों को इसका वास्तविक लाभ कब मिलेगा?

नंदा न्यूज़ की नजर इस जनआंदोलन और सरकार के अगले कदम पर बनी रहेगी।

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