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वशीकरण के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पटेलनगर पुलिस ने किया पर्दाफाश, दो गिरफ्तार,

ऑपरेशन कालनेमि के तहत दून पुलिस की कार्रवाई; तंत्र-मंत्र से समस्याएं दूर करने का झांसा देकर लोगों को बनाते थे निशाना

100 से अधिक लोगों से ठगी करने की बात पूछताछ में आई सामने, फर्जी पहचान पत्रों और बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम के लेनदेन की जांच में जुटी पुलिस

देहरादून। तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ज्योतिष के नाम पर लोगों की परेशानियों का फायदा उठाकर ठगी करने वाले गिरोह का देहरादून पुलिस ने पर्दाफाश किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन कालनेमि के तहत कोतवाली पटेलनगर पुलिस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी खुद को वशीकरण विशेषज्ञ, ज्योतिषाचार्य और तांत्रिक बताकर लोगों को पारिवारिक एवं अन्य समस्याएं दूर करने का झांसा देते थे। पूछताछ में अब तक 100 से अधिक लोगों के साथ ठगी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

चमन विहार में छापेमारी, फर्जी दस्तावेज बरामद,

पुलिस के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 की रात प्रभारी निरीक्षक कोतवाली पटेलनगर को गोपनीय सूचना मिली थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो संदिग्ध व्यक्ति चमन विहार फेज-1 स्थित आशियाना होम्स में किराये पर रह रहे हैं। आरोप था कि वे फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक खाते खुलवा रहे हैं और उनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं।

सूचना के आधार पर प्रभारी निरीक्षक नरेश सिंह राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान सलमान (24 वर्ष), निवासी शामली, उत्तर प्रदेश और शाहरुख (26 वर्ष), निवासी मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, तलाशी में अलग-अलग नामों के आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड, भरे हुए चेक, सिम कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर फंसाते थे लोग,

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुद को वशीकरण विशेषज्ञ, ज्योतिषाचार्य, शास्त्री और तांत्रिक बताकर विज्ञापन प्रसारित करते थे। इन विज्ञापनों के जरिए वे लोगों को अपनी समस्याओं का समाधान तंत्र-मंत्र और विशेष अनुष्ठानों से कराने का भरोसा दिलाते थे।

आरोप है कि अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर वे मोबाइल नंबरों के माध्यम से लोगों से संपर्क करते और कथित तांत्रिक उपायों से समस्याएं दूर करने का झांसा देकर पैसे ऐंठते थे। इस तरह लोगों की पारिवारिक और निजी परेशानियों को ठगी का जरिया बनाया जाता था।

फर्जी पहचान पत्रों से बैंक खाते खुलवाने का आरोप,

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपने अलावा दो अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए थे। इन दस्तावेजों में किराये के पते का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए गए थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जाना था।

पुलिस को आरोपियों के निजी और कथित फर्जी बैंक खातों में भी ठगी से प्राप्त धनराशि के लेनदेन से जुड़े तथ्य मिले हैं। अब जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, कितनी रकम की ठगी हुई और पीड़ित किन-किन स्थानों के रहने वाले हैं।

आठ आधार कार्ड और 10 एटीएम कार्ड समेत दस्तावेज बरामद,

पटेलनगर पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग नामों के आठ आधार कार्ड, विभिन्न बैंकों के 10 एटीएम कार्ड, तीन बैंक पासबुक, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक वोटर कार्ड, दो भरे हुए चेक, ठगी में इस्तेमाल किया गया एक जियो सिम कार्ड, एक मेट्रो कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।

इस मामले में कोतवाली पटेलनगर में मुकदमा संख्या 753/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 318(4), 336(3), 338 और 340(2) में अभियोग दर्ज किया गया है।

एसएसपी के निर्देश पर ऑपरेशन कालनेमि के तहत कार्रवाई,

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने सभी थाना प्रभारियों को आपराधिक गतिविधियों में शामिल संदिग्धों तथा तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों से ठगी करने वालों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसी अभियान के तहत पटेलनगर पुलिस ने यह कार्रवाई की।

इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक नरेश सिंह राठौड़, चौकी प्रभारी बाजार उपनिरीक्षक आशीष कुमार तथा कांस्टेबल राजदीप मलिक, विक्रान्त, अरशद और पंकज शामिल रहे।

नंदा न्यूज़ की अपील: वशीकरण, तंत्र-मंत्र या ज्योतिष के नाम पर निश्चित समाधान का दावा करने वाले अनजान व्यक्तियों को पैसे भेजने से पहले सावधानी बरतें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों की सत्यता जांचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को दें।

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