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बेस नहीं तो वोट नहीं’ की हुंकार: सिमली से देहरादून तक निकली जनपदयात्रा, मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचेगी ग्रामीणों की आवाज,

नंदा न्यूज़ | चमोली की बड़ी खबर

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुन्ना सिंह नेगी के नेतृत्व में सैकड़ों महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे पदयात्रा में शामिल; 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास पहुंचने का लक्ष्य, बेस अस्पताल की शीघ्र घोषणा की मांग।

सिमली/कर्णप्रयाग, चमोली। पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना की मांग को लेकर पहली नवरात्रि पर सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के आह्वान पर सिमली से देहरादून तक पैदल मार्च शुरू किया गया। संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुन्ना सिंह नेगी के नेतृत्व में सैकड़ों महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे इस पदयात्रा में शामिल हुए। चंडी मंदिर, सिमली से शुरू हुई यह यात्रा सरकार तक पहाड़ के ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली गई है।

पदयात्रा में शामिल लोगों का स्पष्ट संदेश है—‘बेस नहीं तो वोट नहीं।’ ग्रामीणों का कहना है कि सिमली में बेस अस्पताल की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अस्पताल की स्थापना की स्पष्ट घोषणा और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचेगी ग्रामीणों की आवाज

संघर्ष समिति के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पदयात्रा 20 अक्टूबर को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचेगी। समिति की प्रमुख मांग है कि सिमली में बेस अस्पताल की शीघ्र घोषणा की जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में गंभीर बीमारी, दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति के दौरान समय पर उपचार उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है। अस्पतालों की दूरी और बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचने में लगने वाला समय मरीजों और उनके परिजनों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा कर सकता है। ऐसे में सिमली में बेस अस्पताल की मांग को ग्रामीण क्षेत्र की बुनियादी स्वास्थ्य जरूरत से जोड़कर देख रहे हैं।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले आंदोलन ने पकड़ा जोर

इस आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पहलू आगामी 2027 विधानसभा चुनाव भी है। संघर्ष समिति और आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि यदि सिमली में बेस अस्पताल की घोषणा नहीं होती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ का नारा प्रमुखता से उठाया जाएगा।

यह नारा केवल चुनावी चेतावनी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की उस अपेक्षा को सामने लाता है जिसमें वे स्वास्थ्य सुविधाओं को विकास की प्राथमिक जरूरत मान रहे हैं। अब सवाल यह है कि वर्षों से उठ रही इस मांग पर सरकार कब तक ठोस निर्णय लेती है।

आज गोचर में रात्रि विश्राम, कल आगे बढ़ेगी यात्रा

 

पदयात्रा के कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा अपने शुरुआती पड़ावों को पार करते हुए कंडियाक क्षेत्र से आगे बढ़ चुकी है। आज रात्रि विश्राम गोचर में प्रस्तावित है। अगले दिन सुबह गोचर स ऋषिकेश की ओर यात्रा आगे बढ़ाने का कार्यक्रम बताया गया है।

सिमली से देहरादून तक की यह पदयात्रा क्षेत्र के ग्रामीणों की एकजुटता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी चिंता को सामने ला रही है। अब सभी की निगाहें 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास पहुंचने वाली इस यात्रा और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

पहाड़ का सवाल, सरकार से जवाब की उम्मीद

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति की यह पदयात्रा एक बुनियादी सवाल खड़ा करती है—क्या पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अब भी लंबा इंतजार करना पड़ेगा? ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना के संबंध में स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

सिमली से देहरादून तक बढ़ते कदमों के साथ आंदोलनकारियों की उम्मीद भी आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने वाली यह आवाज शासन के स्तर पर किस तरह का परिणाम लेकर आती है।

 

नंदा न्यूज़ — पहाड़ की आवाज, जनता के मुद्दे।

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