शिक्षा की आड़ में धर्मांतरण का नेटवर्क? देहरादून के प्रेम नगर क्षेत्र में बाल आयोग की रेड में मिले संदिग्ध दस्तावेज, छापेमारी से मचा हड़कंप
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित खैरी गांव में संचालित एक मिशनरी संस्थान पर उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की छापेमारी के बाद धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और बच्चों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग ने दावा किया है कि निरीक्षण के दौरान ऐसे दस्तावेज और सामग्री मिली हैं, जिनसे शिक्षा और सामाजिक सेवा की आड़ में लोगों को एक विशेष धार्मिक विचारधारा की ओर प्रभावित करने की आशंका जताई जा रही है। मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने सभी दस्तावेज पुलिस प्रशासन को सौंप दिए हैं और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के नेतृत्व में टीम ने प्रेमनगर के खैरी गांव स्थित “मेडिकल एम्बेसडर” नामक संस्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान परिसर से रजिस्टर, फाइलें, पोस्टर, प्रचार सामग्री और अन्य दस्तावेज कब्जे में लिए गए। आयोग के अनुसार प्रारंभिक जांच में संस्थान की गतिविधियां केवल शिक्षा और सामाजिक सेवा तक सीमित नहीं प्रतीत हुईं, बल्कि बच्चों और परिवारों को प्रभावित करने के संकेत भी सामने आए हैं।
निरीक्षण के दौरान आयोग को संस्थान में नियमित और व्यवस्थित शैक्षणिक गतिविधियों के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। टीम ने पाया कि स्टाफ के नाम पर मणिपुर का एक चालक कार्यरत है, जबकि पौड़ी जिले का एक परिवार लंबे समय से परिसर में रहकर संस्थान की गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। आयोग का आरोप है कि दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सहायता के नाम पर विभिन्न स्रोतों से आर्थिक सहयोग प्राप्त किया जा रहा था और लाभ एवं सुविधाओं का प्रलोभन देकर लोगों के धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। जांच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनसे कैनाल रोड स्थित एक अस्पताल से संभावित संबंधों की जानकारी सामने आई है। आयोग ने कहा कि इस पहलू की भी अलग से जांच कराई जाएगी। इसके अलावा बरामद दस्तावेजों में विदेशी फंडिंग मिलने के संकेत मिलने का दावा किया गया है। आयोग को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल देहरादून तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसकी गतिविधियां अन्य राज्यों तक भी फैली हो सकती हैं।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, आर्थिक स्थिति या दिव्यांगता जैसी परिस्थितियों का उपयोग किसी भी प्रकार के उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण में मिले दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर पूरा मामला पुलिस प्रशासन को सौंप दिया गया है। यदि जांच में धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दस्तावेजों की पड़ताल कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।

